Vikram Srivastava

“षडज” @कानपुर

22 अक्टूबर को नेशनल मूवमेंट फ्रंट द्वारा शहीद गणेश शंकर "विद्यार्थी" जी की जयंती पर लाजपत भवन लॉन में आयोजित कार्यक्रम में धाम के बैंड "षडज" ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश सिंह बघेल व पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री श्रीप्रकाश जायसवाल जी थे।    बैंड ने अपनी प्रस्तुति का आरम्भ, हमारे प्रेरणास्रोत स्व. डॉ. निर्मल दर्शन दद्दा को उनका "तरुणाई गीत" गाकर, श्रद्धांजलि देते हुए किया। तत्पश्चात महात्मा गांधी का प्रिय भजन "वैष्णव जन तो तेने कहिये" षडज बैंड ने नए अंदाज में प्रस्तुत कर सभी को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम में आगे षडज ने...

हमसुख़न 1.0

धाम, साहित्य को ख़वास से आवाम तक लाने के अपने प्रयास को लेकर प्रतिबद्ध है। इस दिशा में अपने कार्य को आगे बढ़ाते हुए हमने हर माह एक साहित्यिक आयोजन रखने का वादा किया था जो कि "हमसुखन" के रूप में धरातल पर आया। 20 अक्टूबर की शाम 3 बजे आयोजित हुई हमसुख़न की महफ़िल हम सभी के प्रेरणास्रोत स्व. डॉ निर्मल दर्शन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रारम्भ हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम में 10 नवांकुर कवियों/शायरों ने अपनी रचनायें सुनायी। प्रत्येक काव्यपाठ के बाद उस रचना पर विस्तृत चर्चा की गई। आयोजन का संचालन श्री सलमान 'ख़याल' जी ने...

Let’s Talk 1.0: Love All

धाम और पहल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में LGBTQ+ जागरूकता वार्ता , धाम परिसर में दिनांक 6-Oct'19 को आयोजित की गई। इस सभा का उद्देश्य आम जनमानस में LGBTQ समुदाय के संबंध में जागरूकता बढ़ाना था |  बातचीत का आरंभ LGBTQ समुदाय के परिचय के साथ हुआ तत्पश्चात लैंगिकता पर विस्तार से बात हुई। सत्र आगे बढ़ा उपस्थित आमजन के सवालों के साथ जिनमे LGBTQ समुदाय के साथ पेश आती समस्याओं से जुड़े सवाल प्रमुख थे।   इसी क्रम में संविधान के अनुच्छेद 377 के प्रभावों पर विस्तार पूर्वक बात की गई और...

Worth reading

दास्तानगो अंकित चड्ढा की याद में…

( http://www.chubhan.today से साभार ) आज पता नही क्यों दिल में एक टीस सी है और एक माँ का चेहरा मेरी आँखों के आगे घूम...

Pyaasa: The Greatest Indian Film Ever?

Director- Guru Dutt Story- Abrar Alvi Music- Sachin Dev Burman Lyrics- Sahir Ludhianvi History of Indian Cinema is now more than 100 years old but there have been...

चिट्ठी के नाम खुला ख़त

डिअर चिट्ठी, कहाँ हो आजकल, बहुत दिन हुए तुम आयी नहीं | व्यस्त हो ? बचपन में जब तुमसे पहली बार मिलना हुआ था तब...